
₹5 करोड़ के निर्माण कार्य में‘घोटाला’ का आरोप ! खबरें छपती रहीं, नगर पालिका सोती रही—जनसुनवाई में फूटा भ्रष्टाचार का ‘बम’
(आखिरकार फरियादी को लेनी पड़ी जनसुनवाई की शरण, अपर कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश)
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
पांढुर्णा:- नगर पालिका परिषद पांढुर्णा में वर्ष 2022 की “मुख्यमंत्री अधोसंरचना शहरी विकास योजना (चतुर्थ चरण)” के तहत लगभग ₹5 करोड़ के निर्माण कार्यों में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का मामला अब प्रशासनिक जांच तक पहुंच गया है। लगातार समाचार पत्रों में खबरें प्रकाशित होने के बावजूद नगर पालिका द्वारा कोई ठोस संज्ञान नहीं लेने पर आखिरकार शिकायतकर्ता को जनसुनवाई की शरण लेनी पड़ी।
शिकायतकर्ता मनोज दिनकररावजी गुडधे ने आवेदन के साथ लगातार प्रकाशित समाचारों की कटिंग, RTI दस्तावेज और स्थल निरीक्षण के साक्ष्य संलग्न कर अपर कलेक्टर नीलमणी अग्निहोत्री को शिकायत स्वरूप आवेदन सौंपा। मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर कलेक्टर ने आवेदन पर त्वरित संज्ञान लेते हुए अनुविभागीय अधिकारी (SDM) अलका इक्का को जांच के निर्देश प्रदान किए हैं।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि योजना के तहत बनाए गए सीसी सड़क, पुलिया, रिटर्निंग वॉल, पेवर ब्लॉक एवं नालियां निर्माण के तुरंत बाद ही क्षतिग्रस्त हो रही हैं, जिससे घटिया गुणवत्ता की पोल खुल रही है। कई स्थानों पर कार्य अधूरा है और मानकों की खुली अनदेखी की गई है।

आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि कागजी रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत में भारी अंतर है, जिससे फर्जी बिलिंग और अधिक भुगतान की आशंका जताई गई है। संबंधित ठेकेदार अर्नव कंस्ट्रक्शन, छिंदवाड़ा पर लापरवाही और संभावित मिलीभगत के आरोप भी लगाए गए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि:-
जब लगातार मीडिया में खबरें प्रकाशित हो रही थीं, तब नगर पालिका ने कार्रवाई क्यों नहीं की?
क्या जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर मामले को नजरअंदाज कर रहे थे?:-
अब जबकि प्रशासन ने जांच के निर्देश दे दिए हैं, पूरे शहर की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या इस बार सच सामने आएगा या फिर करोड़ों का यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
नपा प्रशासन का लचीला तंत्र भ्रष्ट:-
जब मीडिया लगातार सच दिखाता रहे और फिर भी जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे रहें, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि सिस्टम की चुप्पी पर भी सवाल खड़ा करता है। आखिर जनता कब तक घटिया विकास का बोझ उठाती रहेगी?